Class 12th Hindi Tirichh chapter saransh bihar board

Class 12th Hindi Tirichh chapter saransh bihar board

 

तिरिछ’ कहानी का कथानक लेखक के पिताजी से सम्बन्धित है। इसका संबंध लेखक के सपने से भी है। इसके अतिरिक्त, शहर के प्रति जो जन्मजात भय होता है उसकी विवेचना भी इस कहानी में की गई है। गाँव एवं शहर की जीवन-शैली का इसमें तुलनात्मक अध्ययन अत्यन्त सफलतापूर्वक किया गया है। गाँव की सादगी तथा शहर का कृत्रिम आचरण इसमें प्रतिबिंबित होता है। लेखक के पिताजी जो पचपन साल के वयोवृद्ध व्यक्ति हैं, उनकी विशिष्ट जीवन शैली है। वह मितभाषी हैं। उनका कम बोलना, हमेशा मुँह में तम्बाकू का भरा रहना भी है। बच्चे उनका आदर करते थे तथा उनकी कम बोलने की आदत के कारण सहमे भी रहते थे। घर की आर्थिक स्थिति संतोषजनक नहीं थी। एक दिन शाम को जब वे टहलने निकले तो एक विषैले जन्तु तिरिछ ने उन्हें काट लिया। उसका विष साँप की तरह जहरीला तथा प्राणघातक होता हैं। रात में झाड़-फूंक तथा इलाज चला दूसरे दिन सुबह उन्हें शहर की कचहरी में मुकदमें की तारीख के क्रम में जाना था। घर से वे गाँव के ही ट्रैक्टर पर सवार होकर शहर को रवाना हुए। वे तिरिछ द्वारा काटे जाने की घटना का वर्णन ट्रैक्टर पर सवार अन्य लोगों से करते हैं। ट्रैक्टर पर सवार उनके सहयात्री पं. राम अवतार ज्योतिषी के अलावा वैद्य भी थे। उन्होंने रास्ते में ट्रैक्टर रोककर उनका उपचार किया। धतूरे की बीज को पीसकर उबालकर काढ़ा बनाकर उन्हें पिलाया गया। ट्रैक्टर आगे बढ़ा तथा शहर पहुँचकर लेखक के पिताजी ट्रैक्टर से उतरकर कचहरी के लिए रवाना हुए। यह समाचार पं. राम अवतारजी ने गाँव आकर बताया, क्योंकि वे (लेखक के बाबूजी) शाम को घर नहीं लौटे थे। विभिन्न स्रोतों से उनके विषयं में निम्नांकित जानकारी प्राप्त हुई। ट्रैक्टर से उत्तरते समय उनके सिर में चक्कर आ रहा था तथा कंठ सूख रहा था। गाँव के मास्टर नंदलाल, जो उनके साथ थे, उन्होंने बताया। इस बीच वे स्टेट बैंक की देशबंधु मार्ग स्थित शाखा, सर्किट हाउस के निकट वाले थाने में गए। उक्त स्थान उन्हें अपराधी प्रवृत्ति तथा असामाजिक तत्त्व समझकर कर काफी पिटाई की गई और वे लहु-लुहान हो गए। अंत में वे इतवारी कॉलोनी गए। वहाँ उनको कहते सुना गया, “मैं राम स्वारथ प्रसाद, एक्स स्कूल हेडमास्टर एंड विलेज हेड़ ऑफ ग्राम बकेली………..” किन्तु वहाँ उन्हें पागल समझकर कॉलोनी के छोटे-बड़े लड़कों ने उनपर पत्थर बरसाकर रही-सही कसर निकाल दी। उनका सारा शरीर लहु-लुहान हो गया। घिसते-पिटते लगभग शाम छः बजे सिविल लाइंस की सड़क की पटरियों पर बनी मोचियों की दुकान में से गणेशवा मोची की दूकान के अन्दर चले गए। गणेशवा मोची उनके बगल के गाँव का रहनेवाला था। उसने उन्हें पहचाना। कुछ ही देर में उनकी मृत्यु हो गई

इस प्रकार इस कहानी के द्वारा लेखक ने सांकेतिक भाषा शैली में आधुनिक शहरों में पसर रही विकृतियों एवं विसंगतियों पर कटाक्ष किया है। दूषित मानसिकता से ग्रसित शहरी जीवन-शैली “तिरिछ” की इस तरह भयानक तथा विषैली हो गई। वास्तविकता की तह में गए बगैर हम दरिन्दगी तथा अमानवीय कृत्यों पर उतर आते हैं।

लेखक का मन्तव्य (उद्देश्य) निम्नांकित पंक्तियों से स्पष्ट हो जाता है, “इस समय पिता जी को कोई दर्द महसूस नहीं हो रहा होगा, क्योंकि वे अच्छी तरह से पूरी तार्किकता और गहराई के साथ विश्वास करने लगे होंगे कि सब सपना है और जैसे ही वे जागेंगे, सब कुछ ठीक हो जाएगा।” लेखक पुनः कहता है- “इसके पीछे पहली वजह तो यही थी कि उन्हें यह अच्छी तरह से पता था कि वे ठेले सपने के भीतर जा रहे हैं और इससे किसी को कोई चोट नहीं आएगी।” इससे (इन पंक्तियों से) कहानी में लेखक का संदेश स्पष्ट परिलक्षित होता है।

Follow This Link

WhatsApp  Join
Official Website  Click Here 
YouTube  Subscribe 
Quiz  Click Here 
Home Page  Click Here 

 

Topics cover

Class 12th Hindi Tirichh Chapter ka saransh, class 12 hindi bihar board 5 marks saaransh, class 12 hindi तिरिछ चैप्टर का सारांश,

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top