Class 12th Hindi 5 VVI Subjective Question Answer 2025

Class 12th Hindi 5 VVI Subjective Question Answer 2025

 

 

(i) जीवन क्या है ? इसका परिचय लेखक ने किस रूप में दिया है ?

(i) जीवन बड़ा अद्भुत है, असीम और अगाध है। यह अनन्त रहस्यों से युक्त एक विशाल साम्राज्य है जिसमें मानव कर्म करते हैं

जीवन का परिचय देते हुए लेखक का मानना है कि इसमें अनेक विविधताओं, अनन्ताओं के साथ रहस्मयताएँ भी विद्यमान हैं। यह कितना विलक्षण है। प्रकृति में उपस्थित पक्षीगण, फूल, वृक्ष, सरिताओं और आकाश के तारों में भी लेखक को जीवन का रूप दिखाई पड़ता है। लेखक ने जीवन का परिचय सर्वरूपों में दिया है।

 

(ii) दलविहीन लोकतंत्र और साम्यवाद में कैसा संबंध है ?

(ii) दलविहीन लोकतंत्र सर्वोदय विचार का मुख्य राजनीतिक सिद्धांत है और ग्राम सभाओं के आधार दलविहीन प्रतिनिधित्व स्थापित हो। दलविहीन लोकतंत्र तो मार्क्सवाद तथा लेनिनवाद के मूल उद्देश्यों में से है। मार्क्सवाद के अनुसार समाज जैसे-जैसे साम्यवाद की ओर बढ़ता जाएगा, वैसे-वैसे राज्य-स्टेट का क्षय होता जाएगा और अंत में एक स्टेटलेस सोसाइटी कायम होगी। वह समाज अवश्य ही लोकतांत्रिक होगी, बल्कि उसी समाज में लोकतंत्र का सच्चा *स्वरूप प्रकट होगा और वह लोकतंत्र निश्चय ही दलविहीन होगा ।

(iii) रामधारी सिंह दिनकर का निधन कहाँ और किन परिस्थितियों में हुआ ?

(iii) रामधारी सिंह दिनकर का निधन 24 अप्रैल, 1974 को हुआ था । उनकी मृत्यु 65 वर्ष की उम्र में हुई थी। अपने अंतिम दिनों वे अवसाद से पीड़ित थे। वे तिरूपति बालाजी गये थे और वहाँ उन्होंने मृत्यु की कामना की थी और अपनी कविता ‘रश्मिरथी’ का पाठ ईश्वर के सम्मुख कर अपनी मृत्यु की कामना की थी। उन्होंने मद्रास में आखिरी साँस ली थी।

(iv) मालती के घर का वातावरण आपको कैसा लगा ? अपने शब्दों में लिखें।

(iv) अज्ञेय की ‘रोज’ शीर्षक कहानी दाम्पत्य जीवन की कहानी है।

सरकारी क्वार्टरों की एकरस उदासी की कहानी है। कहानी की नायिका मालती है जो अपने डॉक्टर पिता के साथ सरकारी क्वार्टर में रहती है। जहाँ बिजली की व्यवस्था ऐसा कि चौबीसों घंटों पानी भी नहीं मिल पाता है। घर में दो पलंग हैं जिसपर कायदे का भी नहीं है। यह बात मालती और लेखक के बीच संवाद से स्पष्ट होती है-

ऐसे ही आये हो ? “नहीं कुली पीछे आ रहा है, सामान लेकर। मैंने सोचा विस्तार ले चलूँ।” अच्छा किया, यहाँ तो बस मालती के घर का वातावरण ऊब और उदासी के बीच ऐसा लग रहा है, मानो उस पर किसी शाम की छाया मँडरा रही हो। वातावरण बोझिल, अकथ्य एवं प्रकम्पमय बना हुआ रहता है।

(v) चंपारण क्षेत्र में बाढ़ की प्रचंडता बढ़ने के क्या कारण हैं ?

(v) चम्पारण क्षेत्र में बाढ़ की विभिषिका से एक विशाल क्षेत्र प्रभावित है। गंडक, मसान, सिकराना, पड़ई इत्यादि इस क्षेत्र में सतत् प्रवाहित होती है। अपने आसपास हरे-भरे वृक्षों का नयनाभिराम दृश्य, मखमली हरित-कालीन सी उर्वरा भूमि को निरंतर अपने जल से सिंचित करती है। मनुष्य, पशु, पक्षी आदि समस्त प्राणियों की प्यास भी इनके जल से बुझती है, तभी तो लेखक ने उन्हें सम्बोधित किया है। “ओ सदानीरा” ।

किन्तु पिछले छह-सात सौ साल से चंपारण से गंगा तक फैले “महावन” (विस्तृत वन क्षेत्र) के वृक्षों को काटा जाना बदस्तूर जाती है। इसके परिणामस्वरूप नदियों के तटों पर पानी का कटाव निरंतर चलता रहता है। यदि इन नदियों में अपना धैर्य खो दिया तो बाढ़ की प्रचंडता स्वाभाविक है। अतः वर्षा ऋतु में हिमालय की ढलान से बाहर आया जल तथा वर्षा का जल बाढ़ की प्रचंडता का कारण बन जाता है। इस त्रासदी को झेलने के लिए यहाँ निवास करने वाले अभिशप्त हैं।

(vi) छत्रसाल की तलवार कैसी है ?

(vi) छत्रसाल की तीक्ष्ण धारवाली चमचमाती तलवार जब म्यान से निकलती थी तो वह प्रलय सूर्य की तेज किरण के सामने लगती थी। वह अरिदल के गज-झुंडों को उसी प्रकार विदीर्ण कर देती थी जिस प्रकार रवि-किरणें सघन अंधकार को फाड़ देती हैं। तेज गति से चलनेवाली वह तलवार शत्रुओं के गले में नागिन-सी लपककर लिपट जाती थी और देखते ही देखते उनके सिरों को घड़ों से अलग कर देती थी। उनके इस सिरच्छेदन के कार्य से ऐसा लगता था मानो वह भगवान रूद्र को मुंडमाल अर्पित कर उन्हें खुश करना चाहती हो । छत्रसाल की तलवार ऐसी है।

(vii) बंधी हुई मुट्ठियों का क्या लक्ष्य है ?

(vii) बंधी हुई मुट्ठियों के लक्ष्य के माध्यम से जनता की ताकत को एहसास कराना चाहता है जो किसी भी विपरीत परिस्थितियों को अपने अनुकूल कर सकती हैं। यह इतनी ताकतवर होती है कि जनशोषक शत्रु को सत्ताच्यूत कर देती है। मुट्ठियों की ताकत सामान्य जनता की ताकत है। यदि इस ताकत के साथ कोई खिलबाड़ करे तो उसकी मिट्टी पलीद हो जाती है। चाहे वह कितना भी बड़ा जन-शोषक क्यों न हो, जब तक ताकत क्रुद्ध होती है तो अपनी ज्वाला में जलाकर राख कर देती है। अतः कवि बंधी हुई मुट्ठिीयों के माध्यम से जन-शोषक को इनसे न टकराने की नसीहत देता है।

 

(viii) शिवाजी की तुलना भूषण ने मृगराज से क्यों की है ?

(viii) जिस प्रकार हाथी सिंह से ज्यादा शक्तिशाली, भारी भरकम वजनी होते हुए भी सिंह द्वारा आखिर मारा जाता है उसी प्रकार हमारे शिवाजी सिंह के समान हैं जो हमेशा दुश्मनों को मार गिराते हैं।

 

(ix) कबीर ने भक्ति को कितना महत्व दिया है ?

(ix) कबीरदास पाखंड के विरोधी थे। षडदर्शन वर्णाश्रम व्यवस्था का

पोषक धर्म था। कबीर ने षड्दर्शन की बुराइयों की तीखी आलोचना की और इसके विचारों की ओर तनिक भी ध्यान नहीं दिया। अर्थात् कानों से सुनकर ग्रहण नहीं किया, बल्कि उसके पाखंड की धज्जी धज्जी उड़ा दी। उन्होंने जनमानस का ध्यान भी इसकी बुराइयों की ओर आकृष्ट किया और उसके विचारों को मानने का विरोध किया।

 

(x) ‘कबहुँक अंब अवसर पाई ।’ यहाँ अंब सम्बोधन किसके लिए है ?

(x) प्रस्तुत पक्ति तुलसीदास के ‘पद’ से उद्धृत है जो ‘विनयपत्रिका’ काव्य कृति से ली गयी है। उपर्युक्त पंक्ति में ‘अंब का संबोधन माँ सीता के

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