Class 12th Biology VVI Long Question Answer board exam 2025

Class 12th Biology VVI Long Question Answer board exam 2025

 

1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें-

(A) डाउन्स् सिण्ड्रोम तथा क्लाइनफेल्टर्स सिण्ड्रोम में अंतर

(B) युग्मक जनन तथा भ्रूणोद्भव में अंतर स्पष्ट करें।

 

उत्तर : (A) डाउन्स् सिण्ड्रोम तथा क्लाइनफेल्टर्स सिण्ड्रोम में अंतर-

(i) क्लाइनफेल्टर और डाउन सिंड्रोम दोनों में, सामान्य 46 के बजाय 47 गुणसूत्र होते हैं। लेकिन, क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम एक सेक्स क्रोमोसोम असामान्यता है, जबकि डाउन सिंड्रोम एक ऑटोसोमल असामान्यता है।

(ii) क्लाइनफेल्टर्स सिंड्रोम सेक्स क्रोमोसोम की कमी के कारण होता है। डाउन्स् सिण्ड्रोम एक अतिरिक्त सेक्स क्रोमोसोम की उपस्थिति के कारण होता है।

(B) युग्मक जनन तथा भ्रूणोद्भव में अंतर- एक झिल्लीदार गर्दन, छोटे कद, खराब या अविकसित स्तन, पतित अंडाशय और अल्पविकसित यौन विशेषताओं वाली महिलाएं। बढ़े हुए स्तनों वाले पुरुष युग्मकों के निर्माण प्रक्रिया को युग्मकजनन कहते हैं। युग्मकों के निर्माण के समय अर्द्धसूत्री विभाजन होने से ये अगुणित होते हैं। युग्मक नर तथा मादा होते हैं जो आपस में संलयित होकर युग्मनज बनाते हैं।

युग्मनज से भ्रूण के विकास की प्रक्रिया को भ्रूणोद्भव कहते हैं। युग्मनज जो कि द्विगुणित होता है, इसके विकास से भ्रूण का निर्माण होता है। भ्रूण प्रायः द्विगुणिते होता है तथा इससे नये पादप का निर्माण होता है।

 

2. लिंग-सहलग्न वंशागति को सोदारहण समझाएँ।

उत्तर : जिन लक्षणों के जीन लिंग क्रोमोसोम पर पाए जाते हैं उनकी वंशागति को लिंग-सहलग्न वंशागति कहते हैं। ड्रोसोफिला एवं मनुष्य में लिंग क्रोमोसोम का एक जोड़ा पाया जाता है। मादा में लिंग क्रोमोसोम (XX) एक समान होते हैं और इस युग्म को होमोमॉर्फिक कहते हैं। जबकि नर में लिंग क्रोमोसोम (XY) एक समान नहीं होते हैं। सामान्यतः मादा में X क्रोमोसोम दंडाकार तथा Y क्रोमोसोम हुक के आकार के होते हैं, इसलिए इन्हें हेटेरोमॉर्फिक क्रोमोसोम कहते हैं। लिंग-सहलग्नता साधारणतया X क्रोमोसोम पर होती है, इसलिए इसे X क्रोमोसोम वंशागति भी कहते हैं। इसके विपरीत यदि सहलग्नता Y क्रोमोसोम से हो तो उसे Y सहलग्नता कहते हैं और इस प्रकार की वंशागति को होलैंड्रिक वंशागति कहते हैं। इस असाधारण वंशागति के बहुत ही कम उदाहरण हैं, जैसे कानों में बाल की बहुलता, स्केली त्वचा आदि। लिंग क्रोमोसोम को हेटेरोसोम या ऐलोसोम भी कहते हैं, इसलिए इस प्रकार की सहलग्नता को हेटेरोसोमल या ऐलोसोमल सहलग्नता भी कहते हैं। X-सहलग्नता के अनेक उदाहरण हैं, जिसमें हीमोफिलिया एवं वर्णांधता प्रमुख हैं। ये दोनों रोग-लक्षणों से संबंधित जीन X क्रोमोसोम पर पाए जाते हैं। रोगका कारण रामजी अवस्था मे

संबंधित जीन X क्रोमोसोम पर पाए जाते हैं। रोग का कारण समयुग्मजी अवस्था में

अप्रभावी जीन होता है, जैसे hh हीमोफिलिया के लिए तथा cc वर्णांधता के लिए।

3. निम्नांकित पर टिप्पणी लिखें-

(A) अण्डोत्सर्ग (B) जलक्रमक

उत्तर : (A) अण्डोत्सर्ग – एक वयस्क स्त्री के दो अंडाशय में लगभग चार

लाख पुटक विद्यमान होता है, लेकिन स्त्री के संपूर्ण जननकाल में अधिकांश पुटक नष्ट होकर स्ट्रोमा के ऊतक में मिल जाता है। इस अवस्था को पुटकीय अछिद्रता (follicular atresia) कहते हैं। अंडाशय से अंडाणुओं के बाहर निस्सरण की क्रिया को अंडोत्सर्ग (ovulation) कहते हैं। साधारणतः प्रत्येक मासिक चक्र (menstrual cycle) में एक अंडाणु का एकांतर अंडाशय (alternate ovaries) से अंडोत्सर्ग होता है। अंडोत्सर्ग प्रति 28 दिन पर (प्रतिमाह) लगभग 45-50 वर्ष की आयु तक होता रहता है। एक नारी अपने जनन-जीवन की अवधि (40-50 वर्ष) में करीब 450 अंडाणु का निर्माण करती है। पुटकीय अछिद्रता के समय पुटक कोशिकाएँ एवं अंडकोशिकाएँ (oocytes) नष्ट हो जाने से भी, स्ट्रोमा से बना एवं पुटक के चारों ओर स्थित कुछ थिकल (thecal) कोशिकाएँ मिलकर अंतराली कोशिकाओं (interstitial cells) के निर्माण करते हैं। इनसे ऐंड्रोजेन (androgen) स्स्रावित होता है। 

(B) जलक्रमक – जल में होने वाले अनुक्रमण को, जलक्रमक कहते हैं, जैसे – नदी, तालाब इत्यादि। यदि जल खारा हो तो उसे लवण क्रमक कहते हैं।

इसमें निम्नलिखित अवस्थायें होती हैं –

(1) पादप प्लवक अवस्था (Phytoplankton stage)

(2) निमग्न अवस्था (Submerged stage)

(3) प्लावी अवस्था (Floating stage)

(4) रीड स्वेम्प अवस्था (Reed swamp stage)

(5) मार्स मीड्यू अवस्था (Marsh meadew stage)

(6) वनस्थली अवस्था (Woodland stage)

(7) वन अवस्था (Forest stage)

 

 

3. ग्रीनहाउस प्रभाव को परिभाषित करें। ग्रीनहाउस गैसों के नाम लिखें एक भूमण्डलीय उष्मायन पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।

उत्तर : प्राकृतिक स्तर पर कार्बन डाइऑक्साइड की एक निश्चित मात्रा (0.03%) वायुमंडल में रहती है जिसके स्तर को बनाए रखने में पौधों की अहम भूमिका होती है क्योंकि पौधे ही सिर्फ ऐसे जीव हैं जो प्रकाशसंश्लेषण द्वारा CO₂ को ग्रहण कर ऑक्सीजन गैस को मुक्त करते हैं जिससे इन दोनों गैसों के बीच एक निश्चित अनुपात बना रहता है। जीवाश्म ईंधनों (लकड़ी, कोयला, पेट्रोल, डीजल आदि) के जलने से एवं जंगलों के लगातार कटने से CO₂ गैस की मात्रा वायु में बढ़ती जाती है। CO₂ गैस में सूर्य की इनफ्रारेड (infrared) किरणों को सोखने की क्षमता रहती है जिससे पृथ्वी का तापक्रम नियंत्रित रहता है। वायुमंडल में उपलब्ध CO₂ कवच के कारण पृथ्वी को जो ऊष्मा प्राप्त होती है, उसे हरितघर प्रभाव या ग्रीनहाउस इफेक्ट कहते हैं। हरितघर या ग्रीनहाउस गैसों में मुख्यतः कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂), मीथेन (CH4), नाइट्रस ऑक्साइड (N₂O) एवं क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs) आते हैं।

पृथ्वी ऊष्मायन या भूमण्डलीय ऊष्मायन : ग्रीनहाउस गैसों के द्वारा उत्पन्न ग्रीन हाउस प्रभाव ही पृथ्वी ऊष्मायन का कारण है। पृथ्वी पर पहुँचने वाली प्रकाशीय ऊर्जा को तो ये गैसें क्षोभमण्डल में आने में कोई बाधा नहीं डालतीं किन्तु ऊष्मा के रूप में जब यह ऊर्जा वापस विकरित होती है तो उसके कुछ भाग को वायुमण्डल में ही रोके रखती हैं अथवा ये ऊष्मारोधी गैसें पृथ्वी से विसरित होकर आयी ऊष्मा का कुछ भाग अवशोषित कर लेती हैं एवं पुनः धरातल को वापस कर देती हैं। इस प्रक्रिया में वायुमण्डल के निचले भाग में अतिरिक्त ऊष्मा एकत्रित हो जाती है। विगत कुछ वर्षों से मानवीय क्रिया-कलापों के कारण इन ऊष्मारोधी गैसों की मात्रा वायुमण्डल में बढ़ जाने के कारण वायुमण्डल के औसत ताप में वृद्धि हो गयी है। इस प्रकार पृथ्वी के औसत तापमान में बढ़ोतरी को पृथ्वी ऊष्मायन या भूमण्डलीय ऊष्मायन या विश्व तापन कहते हैं।

Quiz

Biology VVI Objective Question

1 / 10

1. मानव मादा में गर्भकाल है

2 / 10

2. इनमें से किस बंगाल का आंतक कहा गया है

3 / 10

3. टर्न्ससे सिंड्रोम में कितने गुणसूत्र होते हैं

4 / 10

4. शुक्राणु का संचालन किसके द्वारा होता है

5 / 10

5. काजू निम्नांकित में से कैसा फल कहलाता है

6 / 10

6. परिवार नियोजन कार्यक्रम प्रारंभ किया गया

7 / 10

7. शरीर के बाहर होने वाले निषेचन को कहते हैं

8 / 10

8. प्याज में प्रवर्धन होता है

9 / 10

9. अदरक में कायिक प्रजनन किसके द्वारा होता है

10 / 10

10. ऋतुस्राव चक्र किस में होता है

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4. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें।

(A) ऊर्जा प्रवाह क्या है?

(B) Ori क्या है?

उत्तर : (A) किसी पारिस्थितिकी तंत्र के ऊर्जा प्रवाह का मतलब है कि पारिस्थितिकी तंत्र में ऊर्जा एक जीव से दूसरे जीव तक जाने के लिए मार्ग अपनाती है। किसी पारिस्थितिकी तंत्र का ऊर्जा प्रवाह पारिस्थितिक अध्ययन की एक मौलिक अवधारणा है। किसी पारिस्थितिकी तंत्र का ऊर्जा प्रवाह एकदिशात्मक होता है और आमतौर पर एक पोषी स्तर से दूसरे पोषी स्तर तक भोजन प्रवाह के रूप में होता है। पारिस्थितिकी तंत्र का ऊर्जा प्रवाह उस ऊर्जा का उपयोग करता है जो खाद्य श्रृंखला और खाद्य जाल के माध्यम से बहती है। पारिस्थितिकी तंत्र की गतिशीलता और स्थिरता को समझने के लिए पारिस्थितिकी तंत्र के ऊर्जा प्रवाह को समझना आवश्यक है। पारिस्थितिकी तंत्र का ऊर्जा प्रवाह हमें यह समझने में मदद करता है कि विभिन्न पोषी स्तरों की विभिन्न प्रजातियाँ एक दूसरे के साथ कैसे बातचीत करती है।

(B) ओरि प्रतिकृति की उत्पत्ति का संक्षिप्त रूप है। यह जीनोम का अनुक्रम है जिस पर प्रतिकृति शुरू होती है। ये क्रम बेहद खास है। आनुवंशिक सामग्री को पीढ़ी से पीढ़ी तक पारित करने के लिए कोशिका विभाजन से पहले अर्धसंरक्षी प्रतिकृति द्वारा डीएनए के दोहराव की आवश्यकता होती है। यह अर्ध-रूढ़िवादी प्रतिकृति ओरी साइटों पर शुरू होती है जो प्रतिकृति के लिए शुरुआती साइट को इंगित करती है।

प्लास्मिड में, ओरि साइट पर, यह कोशिकाओं के भीतर जीवित रहने के लिए खुद को पुनः उत्पन्न करना शुरू कर देता है। प्लास्मिड की प्रतिकृतियां क्रोमोसोमल डीएनए से भिन्न होती हैं लेकिन फिर भी अपनी प्रतियाँ बनाने के लिए मेजबान मशीनरी पर निर्भर होती हैं। यूकेरियोट्स में, मनुष्यों में 30,000 – 50,000 ओरी साइटें हैं। प्रतिकृति कांटा मनुष्यों में प्रतिकृति चरण पर बनता है। डीएनए अनुक्रम में

कई ओरि साइट होने के कारण, बहुत सारे प्रतिकृति कांटे होते हैं।

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